मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी का आरोप, इस फैसले ने 1991 के संसद के कानून को दरकिनार कर दिया
वाराणसी
 ज्ञानवापी मामले में वाराणसी कोर्ट के फैसले से नाराज मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कोर्ट पर बड़ा आरोप लगाया है कि यह फैसला जायज नहीं है उन्होंने कहा, "हम फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।" न्यायाधीश ने 1991 के संसद के अधिनियम को रद्द कर दिया। हमारे लिए उच्च न्यायालय के दरवाजे खुले हैं। न्यायपालिका आपकी है। आप संसद के नियमों का पालन नहीं करेंगे। सब बिक चुके हैं।

जानिए विस्तार से क्या कहा आदेश में?
दरअसल, वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में पांच महिलाओं की ओर से दायर अर्जी पर सोमवार को जिला जज की अदालत का फैसला आया है कोर्ट ने अंजुमन इनाजतिया मस्जिद कमेटी की अर्जी खारिज कर दी है मामले संख्या 693/2021 (18/2022) राखी सिंह (और अन्य) बनाम। उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, वाराणसी के जिला न्यायाधीश ने कहा कि उपरोक्त मामला अदालत में चलने योग्य है। इसके साथ ही अदालत ने प्रतिवादी संख्या 2 के आवेदन को खारिज कर दिया। 4 अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी 7/11 को। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे
फैसला सुनने के बाद हिंदू पक्ष खुशी से उछल पड़ा और दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद-मस्जिद प्रबंधन समिति के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वह जिला जज के इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे वहीं, अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने कोर्ट के इस फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, 'कोर्ट ने हमारी दलील मान ली है मुस्लिम पक्ष के आवेदन को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि याचिका विचारणीय है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी

'घी के दीये जलाने की अपील'
हिंदू पक्ष की याचिकाकर्ता मंजू व्यास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोर्ट के फैसले से पूरा देश खुश है हिंदू भाइयों और बहनों से अनुरोध है कि वे अपने घरों में घी के दीपक जलाएं, शंख और ढोल बजाएं और आज फैसले के उपलक्ष्य में 'हर हर महादेव' के नारे लगाएं। वहीं कोर्ट के फैसले के बाद कोर्ट परिसर में हर-हर बम-बम और हर-हर महादेव की घोषणा काफी देर तक गूंजती रही

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